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बस्ती में तालिबानी सूदखोरी: युवक को बंधक बना पीटा, नशे की दवा पिलाकर हड़पी ज़मीन!

सफ़ेदपोश जल्लाद का आतंक: ₹3000 के बदले मांगी ज़िंदगी, बोला- ‘मारकर ज़मीन में गाड़ दूंगा’!

अजीत मिश्रा (खोजी)

💰बस्ती में ‘तालिबानी’ सूदखोरी: कर्ज़ के बहाने युवक को बनाया बंधक, नशीली दवा पिलाकर हड़पी ज़मीन!💰

  • खाकी की चुप्पी… दबंग की गुंडागर्दी! बस्ती में न्याय के लिए दर-दर भटका पीड़ित।
  • DIG के हंटर के बाद जागी बस्ती पुलिस; रसूखदार सूदखोर के आगे नतमस्तक थे ‘साहब’!
  • SP की चौखट पर नहीं मिला न्याय, अब अपराध शाखा खंगालेगी ‘सूदखोर’ पुनीत सिंह की कुंडली।
  • सिस्टम की नाकामी: महीनों तक दबंग देता रहा मौत की धमकी, सोती रही नगर थाना पुलिस।

बस्ती मंडल | ब्यूरो रिपोर्ट

दिनांक: 09 अप्रैल 2026

बस्ती। जनपद के नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पिपरा गौतम (बड़ी पट्टी) से रूह कंपा देने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभ्य समाज और पुलिसिया इकबाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक ‘सफेदपोश जल्लाद’ ने मदद के नाम पर एक युवक को न केवल सूदखोरी के मकड़जाल में फंसाया, बल्कि उसे बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा और नशीला पदार्थ खिलाकर उसकी संपत्ति तक लिखवा ली। हद तो तब हो गई जब महीनों तक गुहार लगाने के बाद भी स्थानीय पुलिस सोती रही और अब DIG के कड़े आदेश के बाद मुकदमा दर्ज करने की खानापूर्ति शुरू हुई है।

🎯मदद का लालच और साजिश का जाल

पीड़ित विपिन सिंह (पुत्र स्व. रामजतन सिंह) की दास्तां किसी फिल्मी विलेन की क्रूरता से कम नहीं है। आरोप है कि गांव के ही दबंग पुनीत सिंह (पुत्र तेज बहादुर सिंह) ने 1 जुलाई 2025 को विपिन को ₹3000 की मामूली रकम 10 प्रतिशत ब्याज पर दी थी। जब विपिन कमाने के लिए हरियाणा गया, तो उसकी तबीयत खराब हो गई। इसी का फायदा उठाकर आरोपी ने जबरन उसके खाते में ₹10,000 और डाल दिए और अपने रसूख का इस्तेमाल कर उसे वापस बुलवा लिया।

🔔बंधक बनाकर यातनाएं: नशे का खेल और तमंचे की नोक

विपिन का आरोप है कि उसे दिल्ली में तीन-चार दिन रखने के बाद बस्ती लाया गया, जहाँ उसे नशीला पदार्थ खिलाकर 2-3 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान आरोपी और उसके गुर्गों ने विपिन को लात-घूंसों से पीटा और तमंचा सटाकर जान से मारने की धमकी दी। 18 दिसंबर 2025 को साजिश के तहत पीड़ित को रजिस्ट्री ऑफिस ले जाया गया और नशे की हालत में बिना जानकारी दिए उससे कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करा लिए गए। इसके बाद उसे अयोध्या ले जाकर डराया-धमकाया गया ताकि वह अपना मुंह न खोल सके।

🔔”मारकर ज़मीन में गाड़ दूंगा”— बेखौफ दबंग, लाचार सिस्टम

जुल्म की इंतिहा यहीं खत्म नहीं हुई। 27 फरवरी 2026 को आरोपी ने फिर से विपिन को पकड़कर पीटा और एक सप्ताह के भीतर गांव छोड़ने का अल्टीमेटम दिया। हैरान करने वाली बात यह है कि पीड़ित ने 28 फरवरी को ऑनलाइन शिकायत की और 11 मार्च को पुलिस अधीक्षक (SP) बस्ती को प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन “साहब” का दिल नहीं पसीजा और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पुलिस की इसी ढिलाई का नतीजा था कि 16 मार्च 2026 को आरोपी ने दोबारा विपिन को पीटा और दहाड़ते हुए कहा— “तुझे मारकर ज़मीन में गाड़ दूंगा, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।” डर के मारे पीड़ित अपने ही घर में कैद होने को मजबूर हो गया।

🚨DIG के हंटर के बाद जागी बस्ती पुलिस

जब ज़िला पुलिस के दरवाज़े बंद मिले, तब हारकर पीड़ित ने पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG), बस्ती परिक्षेत्र से न्याय की गुहार लगाई। मामले की गंभीरता और पुलिस की लापरवाही को देखते हुए DIG ने कड़ा रुख अपनाया और अपराध शाखा को तत्काल मुकदमा पंजीकृत करने के निर्देश दिए।

🔥सवाल तो ये हैं:

⭐क्या बस्ती में कानून का राज खत्म हो चुका है जो एक सूदखोर खुलेआम हत्या की धमकी दे रहा है?

⭐SP को शिकायत देने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या स्थानीय पुलिस अपराधियों से मिली हुई है?

⭐क्या रजिस्ट्री ऑफिस के अधिकारियों को नशे में धुत युवक के हस्ताक्षर लेते समय कुछ भी संदिग्ध नहीं लगा?

🎯मदद का मुखौटा, फिर मौत का जाल

विपिन सिंह का मामला कोई अकेला वाकया नहीं है, यह एक सोची-समझी आपराधिक कार्यप्रणाली है। पहले ₹3000 की मामूली मदद देकर 10% ब्याज का फंदा डालना, फिर मज़बूरी का फायदा उठाकर ज़बरन खाते में पैसे डालना और अंततः नशीला पदार्थ खिलाकर ज़मीन की रजिस्ट्री करवा लेना—यह सूदखोरी नहीं, बल्कि ‘संगठित डकैती’ है। जब रक्षक ही भक्षक की भाषा बोलने लगें और पुलिस अधीक्षक (SP) जैसे आला अधिकारी पीड़ित की गुहार को अनसुना कर दें, तो अपराधी के हौसले बुलंद होना स्वाभाविक है।

🎯खाकी की चुप्पी या अपराधियों को संरक्षण?

यह शर्मनाक है कि एक पीड़ित को न्याय पाने के लिए दर-दर भटकना पड़ा। ऑनलाइन शिकायत और SP को प्रार्थना पत्र देने के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तब DIG के हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज हुआ। सवाल यह है कि स्थानीय पुलिस आखिर किसका इंतज़ार कर रही थी? क्या किसी की लाश गिरने के बाद ही ‘मुकदमा’ शब्द पुलिस की डिक्शनरी में आता है? खाकी की यह उदासीनता ही ‘सूदखोरों’ को यह कहने की ताक़त देती है कि—”मेरा कुछ नहीं कर पाओगे।”

🔔बस्ती मंडल को अब जागना होगा

आज बस्ती, अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में कायस्थों से लेकर शुक्लाजी तक, कई परिवार इन सूदखोरों के चंगुल में फंसकर बर्बाद हो चुके हैं। ये सूदखोर समाज के ‘कोढ़’ हैं, जो इंसानियत को दीमक की तरह चाट रहे हैं।

वक़्त आ गया है कि:

💫प्रशासन: केवल कागजी FIR तक सीमित न रहे, बल्कि इन अपराधियों की अवैध रूप से कब्जाई गई संपत्तियों पर ‘बुलडोजर’ जैसी कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे।

💫समाज: ऐसे सामाजिक दरिंदों का बहिष्कार करे। मौन रहना अपराध को सहना है।

💫पुलिस विभाग: अपनी छवि सुधारने के लिए उन अधिकारियों पर भी नकेल कसे जिन्होंने पीड़ित की शिकायत को “अमानवीय” कहकर ठंडे बस्ते में डाल दिया था।

अगर आज विपिन सिंह जैसे युवाओं को उनके ही गाँव में बंधक बनाकर पीटा जा रहा है और गाँव छोड़ने की धमकी दी जा रही है, तो समझ लीजिए कि लोकतंत्र खतरे में है। DIG साहब के निर्देश एक उम्मीद की किरण तो हैं, लेकिन असली न्याय तब होगा जब ये ‘सूदखोर जल्लाद’ सलाखों के पीछे अपनी क्रूरता का हिसाब देंगे।

इंसानियत और कानून को अब और शर्मसार मत होने दीजिये। जागिये बस्ती, वरना अगला नंबर किसी का भी हो सकता है! इस घटना ने साफ कर दिया है कि बस्ती में सूदखोरों के हौसले बुलंद हैं। अब देखना यह है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस इन ‘नरपिशाचों’ को जेल भेजती है या फिर रसूख के आगे एक बार फिर कानून नतमस्तक हो जाएगा।

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